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17 Jul 2026 | Firdaus Fatma

Babur: The founder of the Mughal Empire in the Indian subcontinent (Hindi Language)

Babur was the founder of the Mughal Empire in the Indian subcontinent. He ranks as a national hero in Uzbekistan and Kyrgyzstan.

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भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में 16वीं शताब्दी एक युगांतरकारी समय था, और इस परिवर्तन के केंद्र में एक ही व्यक्ति था—जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर। वह केवल एक विजेता ही नहीं, बल्कि एक निपुण रणनीतिकार, एक संवेदनशील कवि, और प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन करने वाला लेखक भी था। नीचे सम्राट बाबर के जीवन, उनके संघर्षों, भारत विजय, प्रशासन और उनकी समृद्ध साहित्यिक विरासत का विस्तृत विवरण दिया गया है।


1. प्रारंभिक जीवन और वंश (Early Life & Lineage)

बाबर की पहचान और जन्म सम्राट बाबर एक मध्य एशियाई विजेता था जिसने भारतीय उपमहाद्वीप में विशाल और शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की नींव रखी। उसका जन्म 14 फरवरी, 1483 को अंदिजान (Andijan) में हुआ था, जो फरगना घाटी (Fergana Valley) में स्थित है। यह क्षेत्र आज के आधुनिक उज्बेकिस्तान का हिस्सा है।

बाबर का पूरा और असली नाम ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर (Zahir-ud-din Muhammad Babur) था। यह एक अरबी नाम है जिसका अर्थ है "धर्म का रक्षक (ज़हीरुद्दीन) मुहम्मद"। हालाँकि, मध्य एशिया के तुर्क-मंगोल कबीलों के लिए इस लंबे अरबी नाम का उच्चारण करना थोड़ा कठिन था, इसलिए उसे प्यार और सम्मान से "बाबर" पुकारा जाने लगा। 'बाबर' शब्द मूल रूप से फारसी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ "बाघ" (Tiger) होता है। यह नाम उसके निडर और आक्रामक व्यक्तित्व पर पूरी तरह से सटीक बैठता था।

गौरवशाली वंश बाबर की रगों में दुनिया के दो सबसे महान और खूंखार विजेताओं का खून दौड़ रहा था। अपने पिता, उमर शेख मिर्ज़ा की ओर से वह तैमूर लंग (Timur / Tamerlane) का प्रत्यक्ष वंशज (पांचवीं पीढ़ी) था। वहीं, अपनी माता, कुतुलुग निगार खानम की ओर से वह महान मंगोल विजेता चंगेज़ खान (Genghis Khan) का वंशज (चौदहवीं पीढ़ी) था। इसी मिश्रित तुर्क-मंगोल (Turco-Mongol) विरासत के कारण उसके द्वारा स्थापित साम्राज्य को 'मुगल' (मंगोल का अपभ्रंश) कहा गया।

कम उम्र में राज्याभिषेक बाबर का बचपन बहुत जल्द खत्म हो गया। 1494 में, जब बाबर की उम्र मात्र 12 वर्ष थी, तब उसके पिता उमर शेख मिर्ज़ा की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई (वे अपने महल के कबूतरखाने के साथ खाई में गिर गए थे)। इतनी छोटी सी उम्र में, युवा बाबर को फरगना के सिंहासन पर बैठना पड़ा। अपने ही चाचाओं और रिश्तेदारों के षड्यंत्रों के बीच, 12 वर्षीय बाबर ने अपने राज्य को बचाने के लिए जो संघर्ष शुरू किया, उसने उसे जीवन भर के लिए एक कठोर और अनुभवी योद्धा बना दिया।


2. भारत पर आक्रमण और प्रमुख युद्ध (The Invasion of India & Major Battles)

भारत की ओर रुख करने का कारण बाबर के जीवन का प्रारंभिक सपना अपने पूर्वज तैमूर की राजधानी, समरकंद (Samarkand) पर शासन करना था। उसने समरकंद को जीता भी, लेकिन उज्बेकों (विशेषकर शैबानी खान) के लगातार हमलों के कारण वह बार-बार उसे हार गया। अपने पैतृक वतन समरकंद और फरगना दोनों को खोने के बाद, बाबर दर-दर भटकने को मजबूर हुआ। 1504 में उसने काबुल पर अधिकार कर लिया। समरकंद को सुरक्षित करने में बार-बार मिली विफलता के बाद, उसने अपनी महत्वाकांक्षाओं की दिशा बदल दी। भारत की अपार धन-संपदा, सोने-चांदी के किस्से उसने सुन रखे थे, इसलिए उसने भारतीय उपमहाद्वीप की ओर रुख किया।

भारत आने का निमंत्रण उस समय उत्तरी भारत पर दिल्ली सल्तनत के लोदी वंश का शासन था, और सुल्तान इब्राहिम लोदी एक अलोकप्रिय शासक था। इब्राहिम लोदी के अपने ही लोग उससे असंतुष्ट थे। इसी राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाते हुए, पंजाब के गवर्नर दौलत खान लोदी और मेवाड़ के शक्तिशाली राजपूत शासक राणा सांगा ने बाबर को इब्राहिम लोदी को हराने के लिए भारत आमंत्रित किया। उन्हें लगा था कि बाबर तैमूर की तरह लूटपाट करके वापस काबुल लौट जाएगा, लेकिन बाबर के इरादे कुछ और ही थे।

पानीपत का प्रथम युद्ध (First Battle of Panipat) यह भारत के इतिहास के सबसे निर्णायक युद्धों में से एक था। 1526 ईसवी में दिल्ली के निकट पानीपत के मैदान में बाबर और इब्राहिम लोदी की सेनाओं का आमना-सामना हुआ। इस युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को बुरी तरह पराजित किया और युद्धभूमि में ही इब्राहिम लोदी मारा गया। इसी के साथ दिल्ली सल्तनत का अंत हो गया और भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई।

सैन्य नवाचार (Military Innovations) पानीपत के युद्ध में बाबर की सेना इब्राहिम लोदी की सेना के मुकाबले बहुत छोटी थी, फिर भी वह जीता क्योंकि वह भारत में दो क्रांतिकारी सैन्य तकनीकें लेकर आया था:

1. फील्ड आर्टिलरी (तोपखाना और बंदूकें): बाबर ने भारत में पहली बार प्रभावी ढंग से तोपों (cannons) और माचिस वाली बंदूकों (matchlocks) का इस्तेमाल किया। उस्ताद अली और मुस्तफा उसके प्रमुख तोपची थे।

2. तुलुगमा रणनीति (Tulughma Tactic): यह घुड़सवारों द्वारा दुश्मन को दोनों तरफ (flanks) और पीछे से घेरकर अचानक हमला करने की एक अत्यंत मारक मध्य एशियाई सैन्य रणनीति थी।

खानवा का युद्ध (Battle of Khanwa - 1527) पानीपत जीतने के बाद, बाबर का सबसे बड़ा खतरा मेवाड़ के महाराणा सांगा थे, जो एक शक्तिशाली राजपूत संघ का नेतृत्व कर रहे थे। 1527 में आगरा के पास खानवा के मैदान में यह भयानक युद्ध हुआ। यह पानीपत से भी अधिक कठिन युद्ध था। इस युद्ध में बाबर ने राजपूत संघ को पराजित किया, जिससे उत्तर भारत पर उसकी पकड़ पूरी तरह से मजबूत हो गई। इसी युद्ध को जीतने के बाद बाबर ने 'गाज़ी' (Ghazi - धर्म का योद्धा) की उपाधि धारण की।

चंदेरी और घाघरा के युद्ध

• चंदेरी का युद्ध (1528): खानवा के बाद, बाबर ने राजपूत शक्ति को पूरी तरह कुचलने के लिए 1528 में चंदेरी के किले पर हमला किया। उसने राजपूत शासक मेदिनी राय को हराया और मालवा क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।

• घाघरा का युद्ध (1529): यह बाबर का भारत में लड़ा गया अंतिम प्रमुख युद्ध था। बिहार और बंगाल में अभी भी इब्राहिम लोदी के अफगान समर्थक सक्रिय थे। महमूद लोदी के नेतृत्व में बंगाल और बिहार के अफगान सरदारों के गठबंधन को बाबर ने घाघरा नदी के तट पर बुरी तरह पराजित किया।


3. शासन, प्रशासन और धर्म (Reign, Administration, & Religion)

शासनकाल और प्रशासन भारत में बाबर का शासनकाल बहुत ही संक्षिप्त था। 1526 में पानीपत की जीत से लेकर 1530 में अपनी मृत्यु तक, उसने केवल चार वर्ष भारत पर शासन किया। क्या बाबर ने कोई विशाल प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की? नहीं। अपने चार साल के संक्षिप्त शासनकाल में, बाबर का अधिकांश समय युद्ध लड़ने, विद्रोहों को दबाने और अपने साम्राज्य की सीमाओं को सुरक्षित करने में ही बीता। इसलिए, उसने कोई नई प्रशासनिक या भू-राजस्व प्रणाली लागू नहीं की, बल्कि उसने दिल्ली सल्तनत के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे को ही बनाए रखा और अपने वफादार बेगों (सरदारों) में जागीरें बांट दीं।

धार्मिक विश्वास व्यक्तिगत जीवन में बाबर एक सुन्नी मुसलमान था। वह सूफीवाद में गहरी आस्था रखता था और विशेष रूप से प्रसिद्ध नक्शबंदी सूफी सिलसिले (Naqshbandi Sufi order) का प्रबल अनुयायी था। मध्य एशिया के प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा उबैदुल्लाह अहरार के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा थी।

वास्तुकला में योगदान यद्यपि उसे बड़ी इमारतें बनाने का समय नहीं मिला, लेकिन बाबर ने भारत में फारसी शैली के औपचारिक उद्यानों की शुरुआत की, जिन्हें 'चारबाग' (Charbaghs) कहा जाता है। ये बगीचे पानी की नहरों द्वारा चार सममित (symmetrical) हिस्सों में बंटे होते थे। उसने आगरा में राम बाग (जिसे मूल रूप से 'आराम बाग' या बाग-ए-गुल अफशां कहा जाता था) और धौलपुर में लोटस गार्डन का निर्माण करवाया। इसके अलावा उसने पानीपत (काबुली बाग मस्जिद) और संभल में कुछ मस्जिदों का निर्माण भी करवाया।

भारत के बारे में बाबर के विचार अपनी आत्मकथा में बाबर ने भारत के प्रति अपनी मिश्रित भावनाएँ (mixed feelings) व्यक्त की हैं।

नापसंदगी: उसे भारत की भीषण गर्मी, धूल भरी आंधियां (लू), और यहाँ मध्य एशियाई फलों (जैसे खरबूजे, अंगूर) और ठंडे पानी की कमी बिल्कुल पसंद नहीं थी। उसने लिखा कि यहाँ के लोगों में "शिष्टाचार" की कमी है।

प्रशंसा: दूसरी ओर, उसने भारत की विशालता और इसकी अपार संपदा की अत्यधिक प्रशंसा की। उसने लिखा कि यह एक बहुत बड़ा देश है और यहाँ सोने और चांदी की कोई कमी नहीं है। साथ ही उसने भारतीय कारीगरों और मजदूरों की संख्या और कौशल की भी तारीफ की।

समकालीन भारतीय शासकों पर दृष्टि बाबर भारत की राजनीतिक स्थिति का बारीक जानकार था। उसने अपनी पुस्तक में उल्लेख किया है कि उस समय भारत में कौन सबसे शक्तिशाली था। उसने विशेष रूप से दक्षिण भारत के विजयनगर साम्राज्य के कृष्णदेवराय और उत्तर भारत में मेवाड़ के राणा सांगा को भारत के सबसे शक्तिशाली और दुर्जेय सम्राटों के रूप में मान्यता दी।


4. साहित्य और विरासत (Literature & Legacy)

बाबरनामा (तुजुक-ए-बाबरी) बाबर केवल एक तलवारबाज ही नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि का कलमकार भी था। उसकी सबसे बड़ी साहित्यिक विरासत उसकी आत्मकथा 'बाबरनामा' (जिसे तुजुक-ए-बाबरी भी कहा जाता है) है। इसे इस्लामी साहित्य में लिखी गई पहली वास्तविक और प्रामाणिक आत्मकथाओं (autobiographies) में से एक माना जाता है।

भाषा और ऐतिहासिक महत्व बाबरनामा मूल रूप से बाबर की मातृभाषा, चगताई तुर्की (Chagatai Turkic) में लिखी गई थी (बाद में अकबर के समय में अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना ने इसका फारसी में अनुवाद किया)। यह पुस्तक ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसी राजा द्वारा केवल अपनी प्रशंसा में लिखा गया ग्रंथ नहीं है। इसमें बाबर ने बहुत ही स्पष्टता और बेबाकी (candid account) के साथ अपनी सैन्य रणनीतियों, अपनी भयानक राजनीतिक और सैन्य विफलताओं, अपनी शराब पीने की आदतों और अपनी मानवीय कमजोरियों का वर्णन किया है। इसके अतिरिक्त, इसमें मध्य एशिया, अफगानिस्तान और भारत की वनस्पतियों (flora), जीवों (fauna), नदियों, पहाड़ों, समाज और संस्कृति का अत्यंत सूक्ष्म और वैज्ञानिक विवरण मौजूद है।

क्या बाबर एक अच्छा लेखक था? हाँ, इतिहासकारों द्वारा बाबर को तुर्की भाषा का एक अत्यंत निपुण कवि और गद्य लेखक (highly accomplished poet and prose writer) माना जाता है। चगताई तुर्की साहित्य में मीर अली शेर नवाई के बाद बाबर का ही स्थान आता है। उसने 'दीवान' (कविताओं का संग्रह) की रचना की और खत-ए-बाबरी नामक एक नई लिपि का भी आविष्कार किया था।


5. मृत्यु और उत्तराधिकार (Death & Succession)

मृत्यु का समय और कारण लगातार युद्धों, मध्य एशिया की कठोर जलवायु से निकलकर भारत की गर्मी में रहने, और अत्यधिक शराब व अफीम के सेवन ने बाबर के स्वास्थ्य को बहुत कमजोर कर दिया था। 26 दिसंबर, 1530 को आगरा में मात्र 47 वर्ष की आयु में सम्राट बाबर का निधन हो गया।

इतिहासकारों के अनुसार उसकी मृत्यु एक अचानक और गंभीर बीमारी (संभवतः आंतों की बीमारी या जहर का असर) के कारण हुई थी। हालाँकि, उसकी मृत्यु से जुड़ी एक बहुत ही प्रसिद्ध और लोकप्रिय किंवदंती (legend) है। कहा जाता है कि बाबर का सबसे प्रिय पुत्र हुमायूँ एक बार बहुत गंभीर रूप से बीमार पड़ गया था और हकीमों ने जवाब दे दिया था। तब बाबर ने हुमायूँ के बिस्तर के तीन चक्कर लगाए और अल्लाह से प्रार्थना की कि वह हुमायूँ की जानलेवा बीमारी को उसके (बाबर के) ऊपर स्थानांतरित कर दे। किंवदंती कहती है कि उसी दिन से हुमायूँ ठीक होने लगा और बाबर बीमार पड़ता गया, जिसके अंततः उसकी मृत्यु हो गई। यद्यपि यह एक भावुक कहानी है, आधुनिक इतिहासकार उसकी मृत्यु का कारण प्राकृतिक बीमारी को ही मानते हैं।

उत्तराधिकार और अंतिम विश्राम स्थल बाबर की मृत्यु के बाद उसका सबसे बड़ा बेटा, हुमायूँ (Humayun), मुगल साम्राज्य के सिंहासन पर बैठा।

अपनी मृत्यु के तुरंत बाद, बाबर को शुरू में भारत के आगरा शहर में उसी के द्वारा बनाए गए आराम बाग (नूर-अफ्शां बाग) में दफनाया गया था। लेकिन बाबर को भारत की आबोहवा कभी रास नहीं आई थी और उसकी अंतिम इच्छा थी कि उसे काबुल की खुली और ठंडी हवाओं के बीच दफनाया जाए। अतः, कुछ वर्षों बाद (शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान), उसकी विधवा पत्नी बीबी मुबारिका द्वारा उसके अवशेषों को वहां से निकाला गया और उसकी अंतिम इच्छा के अनुसार उसे काबुल, अफगानिस्तान ले जाया गया। आज बाबर का अंतिम विश्राम स्थल काबुल में 'बाग-ए-बाबर' (Bagh-e Babur) नामक एक सुंदर उद्यान में स्थित है, जो यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है।

Firdaus Fatma
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